फेस्टिव सीजन में कर रहे हैं ऑनलाइन शॉपिंग तो हो जाएं सावधान, फर्जी वेबसाइट्स से ऐसे हो रही है ठगी


इस फेस्टिव सीजन में लोग जमकर ऑनलाइन शॉपिंग कर रहे हैं। फ्लिपकार्ट और अमेजन जैसे प्लेटफॉर्म पर सेल में जमकर खरीदारी हो रही है। ऑनलाइन शॉपिंग करने के लिए लोग ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट और ऐप डाउनलोड करते हैं। लोगों के बढ़ते ऑनलाइन इंट्रेस्ट का फायदा आजकल शतीर साइबर अपराधी भी उठा रहे हैं। ये मिनटों में आपके खाते से पैसे गायब कर देते हैं आइए जानते हैं कि ये कैसे जाल में लोगों को फंसाते हैं और इनसे कैसे बचा जाए।

ऐसे शिकार हैं
वास्तव में इन दिनों साइबर अपराधियों ने बड़े बड़े नामी ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट और एप्सों को बनाया है। ये वेबसाइट आपको ऑरिसनल वेबसाइट के समान ही लगेंगी। आपको वेबसाइट के प्रोडक्ट्स पर भारी पेशकश और विनियमन द्वारा फांसाया जाएगा। लेकिन जब आप इन वेबसाइट या एप्स पर पेमेंट कर रहे हैं तो उसके कुछ देर बाद ये नंबर गायब हो जाएगा। इस तरह साइबर अपराधी बड़े ही शातिराना अंदाज में आपको चूना लगा सकते हैं। साइबर सेल इस तरह की घटनाओं की जांच कर रही है लेकिन अनलिमिटेड नंबर व्हाट होने की वजह से इस तरह के क्राइम पर लगाम नहीं लग पा रही है।

ऐसे चलता है पूरा नेटवर्क
साइबर अपराधी प्लेस्टर पर ऐसी फर्जी एप्स को लॉन्च कर देते हैं जो काफी आसान होते हैं। आपके प्ले स्टोर पर आपको ऐसे कई फर्जी सामान मिल जाएंगे। ये एप्स को ब्रांडेड ई-कॉमर्स वेबसाइट या एप्स के फर्जी फोन के तौर पर बनाया जाता है। उसके बाद शातिर अपराधी अपनी फर्जी वेबसाइट्स पर आपको सामानों पर 60 से 80 प्रति तक का आरक्षण ऑफर करते हैं। आपको जब सस्ती चीजें मिल रही हैं तो आप तुरंत पूरी कर देंगे। बस इसी सस्ते के झांसे में लोग फंस जाते हैं। आप अपने पसंदीदा सामान को कम कीमत में देखर तुरंत पेमेंट कर देते हैं। लेकिन आपके सामान की डिवारी कभी नहीं आती है। जब आप उस नंबर को चेक करते हैं तो वह नंबर भी आपको व्हाट्सएप मिलता है।

ट्रैक करना मुश्किल होता है
ये अपराधी इतने शातिर होते हैं कि कई बार प्लेस्टर की जगह जब Google में किसी सामान को ऑफ़लाइन चेक करते हैं तो ये लोग Google एड वेबसाइट के जरिए अपनी फर्जी वेबसाइट को ट्रेंड करा देते हैं। ऐसे में आप जब सामान खरीदने के लिए उन वेबसाइट या एप्लिकेशन पर क्लिक करते हैं तो आपको भारी छूट दी जाती है। याद रखें ये एप्लिकेशन आपकी संख्या के बाद उपयोगकर्ता द्वारा कर दिए जाते हैं। पुलिस का कहना है कि उस व्यक्ति को ट्रैक करने की वजह से ऐसे लोगों को ट्रैक करना काफी मुश्किल है।

कई कस्टमर्स को ऐसे फर्जी ऐप्स और डेटा के बारे में तब पता चला जब नोट नहीं आने पर उन्होंने कंपनी के कस्टमर कैर में फोन किया। सभी ई-कॉमर्स कंपनी के स्टमर कैर की ओर से बताया गया कि ऐसी उनकी कोई ऐप नहीं है और न ही कंपनी की ओर से ऐसा कोई ऑफर दिया जा रहा है।

ऑफ़लाइन फर्जी वेबसाइटों से कैसे
आप किसी कंपनी की वेबसैट के बारे में इटरनेट से पता लगा सकते हैं, इस तरह की कई बुकिंग हैं जो कंपनी के पंजीकरण से लेकर कंपनी कितनी पुरानी है उसकी लीगलिटी क्या है ऐसी तमाम जानकारी आपको दे देगी। कोई भी पेमेंट करने से पहले ई-कॉमर्स कंपनी के बारे में जांच लें।

किसी भी कंपनी के पेज पर नीचे जाने के लिए डेटाशीट ऑप्शन जरूर देख लें। अगर कंपनी सही होगी तो यहां आपको वैट आई डी भी दिखाई देगी।

अगर वेबसाइट के आगे https नहीं लगा तो समझो ये फर्जी साइट है।

रेजर्ड वेबसाइट के URL के सामने हमेशा लॉक लगा होता है यह जरूर चेक कर लें।

वेबसाइट के होम पेज पर जाएं संपर्क पर क्लिक करें अगर यहां आपको एड्रेस जैसी जानकारी न मिली हो तो ऐसी जानकारी से खरीदारी करने से बचें।

ये भी पढ़ें

ऑफ़लाइन फ्रॉड से बचने के लिए इंश्योरेंस चाहिए? जानिए टॉप 3 साइबर इंश्योरेंस और उनके कवर के बारे में

दिवाली खरीदारी की लिस्ट कर लें तैयार, फ्लिपकार्ट ला रहा है बिग दिवाली सेल





Source link

Leave a Reply